August 29, 2025 6:51 pm
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राहुल संग प्रियंका भी उतरी मैदान में, ज़मीनी खबरों पर चर्चा गर्म

बिहार में वोटर अधिकार यात्रा के दसवें दिन विपक्ष ने चुनाव आयोग पर बड़े पैमाने पर वोट चोरी का आरोप लगाया। 65 लाख नाम मतदाता सूची से गायब, प्रियंका गांधी और रेवंत रेड्डी पहुँचे बिहार।

बिहार में वोटर अधिकार यात्रा के दसवें दिन विपक्ष ने तेज किया वोट चोरी के खिलाफ़ आंदोलन

बिहार की ज़मीन पर विपक्ष की वोटर अधिकार यात्रा अपना दसवां दिन पूरा कर चुकी है। सुपौल से शुरू होकर दरभंगा पहुँची इस यात्रा ने बीते दस दिनों में चुनावी प्रक्रिया में हो रही वोट चोरी और मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नामों की कटौती के मुद्दे को राष्ट्रीय बहस का केंद्र बना दिया है।

कांग्रेस ने जारी की संदिग्ध मकानों की सूची

आज सुबह कांग्रेस पार्टी ने उन मकानों की सूची सार्वजनिक की है, जहाँ सौ से अधिक मतदाता दर्ज हैं। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब चुनाव आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न (SIR) प्रक्रिया के तहत जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट को लेकर हंगामा मचा हुआ है। विपक्ष का आरोप है कि यह पूरी प्रक्रिया “वोट की डकैती” है।

प्रियंका गांधी और रेवंत रेड्डी का बिहार आगमन

आज यात्रा में नया मोड़ तब आया जब कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी और तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी बिहार पहुँचे। आने वाले दिनों में अखिलेश यादव और एम.के. स्टालिन समेत इंडिया गठबंधन की शीर्ष नेतृत्व भी इस यात्रा से जुड़ने वाला है। इससे साफ है कि विपक्ष अब इसे एक राष्ट्रीय स्तर का अभियान बनाने की तैयारी में है।

“वोट चोर गद्दी छोड़”: विपक्ष का नया नारा

यात्रा के जरिए गूँज रहा नारा – “वोट चोर गद्दी छोड़” – अब दिल्ली तक पहुँच गया है। मानसून सत्र के आखिरी दिन जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संसद में दाखिल हुए, तो विपक्ष ने पहली बार सदन के भीतर इस नारे से उनका स्वागत किया।

65 लाख मतदाता सूची से बाहर

यात्रा के केंद्र में वह सवाल है जिसने पूरे बिहार की सियासत को हिला दिया है। चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक 65 लाख नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं।

  • टाइम्स ऑफ इंडिया ने भी इसे “The 65 lakh question” शीर्षक से उठाया।
  • विशेषकर पटना, मधुबनी और पूर्वी चंपारण जिलों में डिलीशन की संख्या चुनावी हार-जीत के अंतर से अधिक है।
  • इससे साफ होता है कि वोट कटौती किसी सामान्य गलती का नतीजा नहीं बल्कि एक सुनियोजित साज़िश है।

महिलाओं पर सबसे बड़ा असर

रिपोर्ट्स बता रही हैं कि वोटर डिलीशन में सबसे अधिक महिलाओं के नाम काटे गए हैं। शादी, दस्तावेज़ों की कमी और प्रक्रिया की जटिलताओं के कारण महिलाओं पर ज्यादा असर पड़ा है। यह मताधिकार पर सीधा हमला है।

नौजवानों की आवाज़ और गुस्सा

इस यात्रा में बड़ी संख्या में युवा शामिल हो रहे हैं। प्रेम सागर कुमार जैसे युवा, जो वैज्ञानिक बनना चाहते हैं, अपनी शिक्षा और भविष्य पर सवाल उठा रहे हैं। वे कह रहे हैं – “हम पढ़ना-लिखना चाहते हैं, वैज्ञानिक बनना चाहते हैं। क्या मोदी जी हमें घुसपैठिया मानेंगे?”

मुस्लिम समुदाय में गहरी चिंता

ड्राफ्ट लिस्ट से मुस्लिम परिवारों के नाम कटने की खबरें गहरी चिंता पैदा कर रही हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, मतदाता सूची से नाम हटने पर नागरिकता छिन जाने का डर अल्पसंख्यक समुदाय को परेशान कर रहा है।

चुनाव आयोग की उलझन

चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद डेटा सार्वजनिक किया। लेकिन चौंकाने वाला तथ्य यह सामने आया कि जनवरी 2025 से अगस्त 2025 तक बिहार में एक भी नागरिक 18 साल का नहीं हुआ। यह आंकड़ा खुद आयोग के रिकॉर्ड में दर्ज है, जिससे उसकी विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

विपक्ष का आरोप: “एक्सक्लूज़न, नॉट इन्क्लूज़न”

भाकपा(माले) के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा कि SIR का पूरा मकसद नए मतदाताओं को शामिल करना नहीं बल्कि पुराने नामों को हटाना है। उनका दावा है कि पहले ही 65 लाख नाम हटाए जा चुके हैं और अब 15 लाख और लोगों पर खतरा मंडरा रहा है।

निचोड़

वोटर अधिकार यात्रा बिहार के गली-कूचों से निकलकर अब राष्ट्रीय विमर्श का हिस्सा बन चुकी है। विपक्ष इसे लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों की लड़ाई बता रहा है। सवाल यह है कि क्या चुनाव आयोग और केंद्र सरकार इन आरोपों का संतोषजनक जवाब दे पाएंगे, या फिर 2025 का चुनाव भारत के चुनावी इतिहास पर सबसे गहरे सवाल छोड़ जाएगा।

भाषा सिंह

1971 में दिल्ली में जन्मी, शिक्षा लखनऊ में प्राप्त की। 1996 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं।
'अमर उजाला', 'नवभारत टाइम्स', 'आउटलुक', 'नई दुनिया', 'नेशनल हेराल्ड', 'न्यूज़क्लिक' जैसे
प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों

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