August 29, 2025 8:56 pm
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घुसपैठिया बनाम वोट चोर: बिहार चुनाव का एजेंडा तय

बिहार विधानसभा चुनाव से पहले मोदी ने गया रैली में फिर उठाया ‘घुसपैठिया’ मुद्दा। विपक्ष ने पलटवार करते हुए कहा—"वोट चोर गद्दी छोड़"। जानिए बिहार की ज़मीन पर किसका नैरेटिव हावी है।

बिहार चुनाव मोदी के ‘घुसपैठिया’ जुमले और विपक्ष के ‘वोट चोर गद्दी छोड़’ नारे के बीच तय होगा

बिहार विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल पूरी तरह गरमा चुका है। शुक्रवार को गया पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर अपने पुराने राजनीतिक हथियार का इस्तेमाल किया—”घुसपैठिया” का मुद्दा। मोदी ने न केवल यह कहा कि बिहार और देश में घुसपैठियों ने डेमोग्राफिक बदलाव ला दिया है, बल्कि विपक्षी दलों को भी “देश के भीतर बैठे घुसपैठिया” करार दिया।

लेकिन इसी बीच विपक्ष की तरफ़ से ज़मीन से उठ रही आवाज़ें मोदी के इस नैरेटिव को चुनौती देती दिख रही हैं। इंडिया गठबंधन की वोटर अधिकार यात्रा में राहुल गांधी, तेजस्वी यादव और भाकपा (माले) के महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य जैसे नेता लगातार यह नारा बुलंद कर रहे हैं—”वोट चोर गद्दी छोड़”।

मोदी का ‘घुसपैठिया’ मंत्र और सवाल

मोदी ने अपने भाषण में आरोप लगाया कि बिहार में बड़े पैमाने पर घुसपैठ हुए हैं। सवाल यह है कि अगर वाकई ऐसा हुआ है, तो यह जिम्मेदारी किसकी है?

  • मोदी पिछले 11 साल से प्रधानमंत्री हैं।
  • नितीश कुमार 20 साल से मुख्यमंत्री हैं।
  • गृह मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय बीजेपी के ही पास हैं।

तो फिर अगर घुसपैठिए इतनी संख्या में बिहार में दाखिल हो गए हैं, तो ज़िम्मेदार कौन? विपक्षी नेताओं का सीधा तर्क है कि यह असफलता मोदी और उनके सहयोगी नीतीश कुमार की है।

बांग्लादेश और शेख हसीना पर राजनीतिक पहेली

मोदी ने संकेत दिया कि घुसपैठिए बांग्लादेश से आए हैं। लेकिन यही वह समय है जब बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना, जिन्हें मोदी सरकार ने भारत में शरण दी है, उनकी “करीबी मित्र” रही हैं। सवाल उठता है—क्या मोदी यह कहना चाह रहे हैं कि शेख हसीना के कार्यकाल में ही यह घुसपैठ हुआ?

विपक्ष का पलटवार

कांग्रेस के बिहार प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम और RJD सांसद संजय यादव ने मोदी को घेरते हुए कहा:

  • अगर घुसपैठिए आए हैं तो गृह मंत्रालय और चुनाव आयोग ने क्या किया?
  • अगर ये वोटर बन गए तो नितीश कुमार की सरकार क्या कर रही थी?
  • क्या मोदी की सरकार “कमजोर और नाकाबिल” है जो घुसपैठ रोक नहीं पाई?

विपक्ष का आरोप यह भी है कि मोदी सरकारी आयोजनों को चुनावी रैलियों में बदल देते हैं और जनता के पैसों पर राजनीति करते हैं।

SC का झटका: 66 लाख वोटर डिलीट

मोदी जब बिहार में घुसपैठिए का राग अलाप रहे थे, ठीक उसी दिन सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को फटकार लगाते हुए कहा कि 66 लाख वोटरों के नाम डिलीट करना असंवैधानिक है और उन्हें दस्तावेज़ के आधार पर बहाल किया जाना चाहिए। ऐसे में सवाल उठता है—क्या सभी डिलीट किए गए वोटर घुसपैठिए थे या यह राजनीतिक साज़िश थी?

जमीन पर ‘वोटर अधिकार यात्रा’ का असर

राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की अगुवाई में चल रही वोटर अधिकार यात्रा में बड़ी संख्या में आम लोग जुड़ रहे हैं। खास बात यह है कि 10 लाख से अधिक आशा वर्कर्स और महिलाएं भी इस आंदोलन का हिस्सा बन चुकी हैं। वे अपने अधिकारों और उचित वेतन की मांग को इस यात्रा से जोड़ रही हैं।

यह संकेत है कि बिहार की राजनीति का नैरेटिव सिर्फ़ मोदी के घुसपैठिए वाले मुद्दे तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ज़मीनी मुद्दे—रोज़गार, स्वास्थ्य, शिक्षा और अधिकार—भी चुनावी एजेंडा तय करेंगे।

भाषा सिंह

1971 में दिल्ली में जन्मी, शिक्षा लखनऊ में प्राप्त की। 1996 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं।
'अमर उजाला', 'नवभारत टाइम्स', 'आउटलुक', 'नई दुनिया', 'नेशनल हेराल्ड', 'न्यूज़क्लिक' जैसे
प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों

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