“ना झुकेंगे, ना डरेंगे” SSC छात्रों का ऐलान, अमित शाह की दिल्ली पुलिस पर उठे सवाल
दिल्ली के रामलीला मैदान की वो तस्वीरें देखिए — हाथों में किताबें होनी चाहिए थीं, लेकिन पुलिस की लाठियों से सिर फूट रहे हैं। सवाल ये है कि इन छात्रों ने माँगा क्या था? मंत्री पद? अरबों की दौलत? या सरकारी गाड़ी? नहीं। उन्होंने तो नौकरी भी नहीं माँगी। माँगा क्या? बस एक सही परीक्षा। और बदले में मिला क्या? लाठीचार्ज और जेल।
लोकतंत्र या लाठी-तंत्र?
किसान अपनी फ़सल का दाम माँगते हैं, उन्हें लाठी मिलती है। बेरोज़गार रोज़गार माँगते हैं, उन्हें भी लाठी मिलती है। अब छात्र निष्पक्ष परीक्षा माँग रहे हैं, तो उन्हें भी लाठी मिल रही है। क्या यही है बीजेपी का “रामराज”?
24 अगस्त की रात, जब अंधेरे में बिजली काटी गई और पुलिस ने मैदान को छावनी में बदल दिया, तब छात्रों को खदेड़ा गया। पुलिस का कहना है कि अनुमति सिर्फ़ शाम 5 बजे तक थी। लेकिन छात्रों का कहना है कि उन्होंने बाक़ायदा 24 और 25 अगस्त की अनुमति ली थी। सच्चाई क्या है? यह आप इन तस्वीरों और वीडियोज़ में साफ़ देख सकते हैं, जिनसे पुलिस के दावे की पोल खुल जाती है।SSC (Staff Selection Commission) परीक्षा में गड़बड़ियों के खिलाफ शांतिपूर्ण धरना दे रहे छात्रों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया और कई छात्रों को हिरासत में ले लिया।
छात्रों की माँग: सिर्फ़ एक निष्पक्ष परीक्षा
धरने में शामिल छात्र-छात्राओं ने कहा कि वे नौकरी, दौलत या किसी राजनीतिक पद की माँग नहीं कर रहे, बल्कि सिर्फ़ एक निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा चाहते हैं। पिछले कई वर्षों से SSC की परीक्षाओं में धांधली, पेपर लीक और अनियमितताओं की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं।
पुलिस का पक्ष और विरोधाभास
पुलिस ने दावा किया कि प्रदर्शन की अनुमति सिर्फ़ शाम 5 बजे तक थी, इसलिए उसके बाद छात्रों को हटाया गया। वहीं, लाठीचार्ज से इनकार किया गया, जबकि सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरें और वीडियो पुलिस की कार्रवाई को उजागर कर रहे हैं।
विपक्ष का हमला: “लाठी-तंत्र नहीं, लोकतंत्र चाहिए”
इस घटना पर विपक्षी नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
- प्रियंका गांधी ने लिखा:
“दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रदर्शन कर रहे SSC छात्रों पर पुलिस बल प्रयोग अमानवीय और शर्मनाक है। हर परीक्षा में धांधली, हर भर्ती में घोटाला और पेपर लीक से युवा त्रस्त हैं। युवाओं की बात सुनने की जगह उन पर लाठियाँ बरसाना दुर्भाग्यपूर्ण है।” - अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट किया:
“देखिए BJP की तानाशाही और गुंडागर्दी। जो हाथों में कल किताबें होनी चाहिए थीं, उन पर आज लाठियाँ बरसीं। सरकार से न्याय माँग रहे छात्रों को अंधेरे में पीटा गया।”
परीक्षा प्रणाली में लगातार संकट
यह पहली बार नहीं है जब परीक्षाओं की पारदर्शिता पर सवाल उठे हैं।
- NEET-UG 2024 का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुँचा।
- CUET-UG और JSSC-CGL जैसी परीक्षाओं में भी गड़बड़ियों और पेपर लीक की शिकायतें हुईं।
- उत्तर प्रदेश, बिहार समेत कई राज्यों में शिक्षक भर्ती और सरकारी नौकरी परीक्षाओं में घोटाले सामने आते रहे हैं।
छात्रों और शिक्षकों का कहना है कि सालों की मेहनत और तैयारी के बाद उन्हें सिर्फ़ धोखा मिलता है और जब वे आवाज़ उठाते हैं, तो जवाब में पुलिसिया दमन।
असली सवाल
क्या ये लोकतंत्र है या “लाठी-तंत्र”?
क्या सरकार का काम युवाओं की आवाज़ सुनना है या उन्हें कुचलना?
क्या प्रधानमंत्री मोदी और उनकी सरकार इन भर्ती एजेंसियों की जवाबदेही तय करेंगे या फिर हर बार की तरह चुप रहेंगे?
अगर युवाओं की सबसे मामूली माँग — एक निष्पक्ष परीक्षा — भी सरकार को बर्दाश्त नहीं होती, तो सोचिए यह सत्ता आखिर किस रास्ते पर जा रही है।