राहुल-तेजस्वी ने भक्तों का ‘गर्दा’ उड़ा दिया, अंबानी-अडानी पर भी हमला बोला
इतवार का दिन था और बिहार की सियासत में धमाका हो गया। राहुल गांधी और तेजस्वी यादव जब बाइक पर निकले, तो पूरा नज़ारा बदल गया। वोटर अधिकार यात्रा का आठवां दिन बिहारियों की जुबान में कहें तो भक्तों का गर्दा उड़ा दिया। सड़क पर सिर्फ बाइकें नहीं दौड़ीं, नौजवानों की धड़कनें भी तेज़ हुईं।
बिहार ने बार-बार दिखाया है कि यहां का ज़मीनदार जनता है। और आज नौजवानों की भीड़ ने बता दिया कि मोदी-भक्तों की रातों की नींद हराम हो चुकी है।
66 लाख वोटरों के नाम काटे गए – यही है असली मुद्दा
बिहार की वोटर लिस्ट से 66 लाख नाम गायब कर दिए गए। सोचिए, 33 लाख वो लोग जो रोज़गार की तलाश में बाहर काम करते हैं, चुनाव आयोग ने कह दिया—“तुम यहां रहते नहीं हो, तुम्हारा वोट कैंसिल।”
क्या यह वोट चोरी नहीं है?
राहुल गांधी ने साफ कहा:
“ये वोट चोरी मोदी जी कर रहे हैं, ताकि गरीब, दलित, पिछड़े, आदिवासी और अल्पसंख्यक की आवाज़ दबा दी जाए। सिर्फ अडानी-अंबानी की आवाज़ सुनाई दे।”
यानी बात सीधी है—गरीब का वोट गायब, अमीर का फायदा पक्का।
सड़क पर नौजवान, हवा में जोश
यात्रा की असली ताकत है बिहार का युवा वोटर। राज्य में 56% वोटर 40 साल से कम उम्र के हैं। बेरोजगारी, पेपर लीक, नौकरी का संकट—सबकी आग इस यात्रा में दिखी।
इतना जोश कि एक नौजवान सुरक्षा घेरे को तोड़कर राहुल गांधी तक पहुंच गया। सलाम किया, जबरन किस किया और बाहर निकाला गया। संकेत साफ है—जनता अपने नेताओं को राजा की तरह नहीं, साथी की तरह देखना चाहती है।
मोदी की रैलियों में बसों की भीड़, यहां जनता का सैलाब
इसी बीच पीएम मोदी गया पहुंचे। गमछा घुमाकर भीड़ को लुभाने की कोशिश की। लेकिन फर्क देखिए—मोदी की रैलियों में बसों में भरकर लाई गई भीड़, जबकि राहुल-तेजस्वी की यात्रा में जनता खुद सड़क पर उमड़ी।
औरतों की सबसे बड़ी संख्या भी राहुल-तेजस्वी से मिली। आशा वर्कर्स और जीविका समूह की महिलाएं—जिन्हें 54 काम करने के बावजूद सिर्फ 2000 रुपये मिलते हैं—उन्होंने साफ कहा कि यह सरकार उनका शोषण कर रही है।
विपक्ष का नया नारा: “वोट चोर गद्दी छोड़”
यह यात्रा सिर्फ रोड शो नहीं, एक आंदोलन बन रही है। हर तरफ गूंज रहा है—
“वोट चोर गद्दी छोड़।”
राहुल गांधी ने ललकारा:
“बिहार में एक भी वोट चोरी नहीं होने देना है।”
इस ललकार का असर साफ दिख रहा है। भक्त चाहे जितना “पप्पू-पप्पू” चिल्लाएं, लेकिन सच्चाई यह है कि सड़क पर जनता राहुल-तेजस्वी के साथ खड़ी है।
विपक्षी एकजुटता और आगे की तस्वीर
यात्रा में राहुल-तेजस्वी के साथ CPI(ML) के दीपांकर भट्टाचार्य भी हैं। जल्द ही अखिलेश यादव और प्रियंका गांधी भी शामिल होंगे। यानि कि इंडिया गठबंधन अब मैदान में उतर चुका है।
यह भी साफ है कि बिहार से उठी आवाज अब दिल्ली तक जाएगी। क्योंकि मुद्दे असली हैं—वोट चोरी, बेरोजगारी, किसान और संविधान बचाने की लड़ाई।
निष्कर्ष
बिहार की धरती ने हमेशा सत्ता के तख्ते पलटे हैं। इस बार भी तस्वीर वैसी ही बन रही है। वोटर अधिकार यात्रा ने भक्तों की नींद और मोदी सरकार की बेचैनी दोनों बढ़ा दी हैं।
सवाल वही है—क्या लोकतंत्र जनता के पास लौटेगा, या सत्ता की बंद कमरों की सौदेबाज़ी में ही कैद रहेगा?