August 29, 2025 6:51 pm
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यूरिया संकट: भूखे-प्यासे किसान, पुलिस की लाठियां और सरकारी दावों की पोल

यूपी और एमपी में किसानों को यूरिया खाद की भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। लंबी कतारें, पुलिस की लाठियां और सरकारी दावों की पोल—खरीफ फसल पर संकट।

मोदी जी कहते हैं, अब किसान खाद के लिए लाइन में नहीं लगता, तो फिर यह क्या है!

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुछ समय पहले दावा किया था कि अब किसानों को खाद के लिए लाइन में नहीं लगना पड़ता। लेकिन उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश से आई तस्वीरें इस दावे को झुठलाती हैं। खरीफ के मौसम में किसानों को सबसे ज्यादा ज़रूरत यूरिया की होती है, और यही खाद इस समय सबसे बड़ी किल्लत बन चुकी है।

जिलों में लाइन, भूख-प्यास और हताशा

पूर्वी यूपी के अयोध्या, बलरामपुर, गोंडा, सिद्धार्थनगर और देवरिया जिलों में हालात सबसे खराब हैं। सहकारी समितियों के बाहर सुबह से लेकर देर रात तक किसानों की लंबी कतारें लगी रहती हैं।

  • एक किसान ने कहा – “साहब, तीन दिन से लाइन में हूँ। घर में बच्चे भूखे हैं लेकिन बिना यूरिया खेत में धान बर्बाद हो जाएगा।”
  • महिला किसानों की हालत और भी खराब है। वे बच्चों को गोद में लेकर घंटों बारिश और धूप में खड़ी रहती हैं। उनकी एक ही मांग है – “हमें बस खाद चाहिए।”

मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा और सतना से भी यही तस्वीर सामने आ रही है। किसान ट्रैक्टर-ट्रॉली में भरकर कई किलोमीटर दूर सहकारी केंद्रों तक जा रहे हैं और खाली हाथ लौट रहे हैं।

पुलिस लाठियां और प्रशासन की नाकामी

लाइन में धक्का-मुक्की और भगदड़ रोकने के लिए कई जगह पुलिस तैनात है। लेकिन किसानों को सुरक्षा देने की बजाय पुलिस लाठियां बरसाती दिख रही है।

  • बलरामपुर और गोंडा में किसानों पर पुलिस के डंडे चलने की घटनाएं सामने आईं।
  • कई किसानों ने कहा कि पुलिस का रवैया अपराधियों जैसा है—“खाद मांगो तो डंडा मिलता है।”

कई केंद्रों पर POS मशीन और नेटवर्क फेल हो जाते हैं। किसान घंटों लाइन में खड़े रहते हैं और जब नंबर आता है तो मशीन खराब बताकर उन्हें लौटा दिया जाता है।

बीजेपी नेताओं का विरोध और इस्तीफे

इस संकट ने सत्तारूढ़ पार्टी के भीतर भी नाराजगी पैदा कर दी है।

  • बहराइच में भाजपा किसान मोर्चा के जिला अध्यक्ष ने इस्तीफा दे दिया और कहा कि वे किसानों की मदद नहीं कर पा रहे हैं।
  • श्रावस्ती, सीतापुर और बलरामपुर के कृषि अधिकारियों पर कार्रवाई हुई, जो यह साबित करता है कि सरकार भी अव्यवस्था मान रही है।

विपक्ष का हमला

समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा मंदिर-मस्जिद की राजनीति में व्यस्त है और किसान भूखा-प्यासा लाइन में खड़ा है। उन्होंने ट्वीट कर लिखा कि यह वही ‘किसान कलियुग’ है, जिसके बारे में चेतावनी दी गई थी।

खरीफ की फसल और देश की चिंता

खरीफ का मौसम धान, मक्का और गन्ने जैसी फसलों के लिए अहम है।

  • इन फसलों को यूरिया (नाइट्रोजन), डीएपी (फास्फोरस) और एमओपी (पोटाश) की ज़रूरत होती है।
  • यूरिया की सबसे ज्यादा कमी है और बिना इसके फसल बर्बाद हो सकती है।
  • इसका सीधा असर किसानों की आय और देश के अन्न भंडार पर पड़ेगा।

नतीजा: दावों और हकीकत के बीच गहरी खाई

सरकार कह रही है कि राज्यों को पर्याप्त खाद दी गई है, लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि किसान भूखे-प्यासे लाइन में हैं, महिलाएं बच्चों को गोद में लेकर रो रही हैं और पुलिस किसानों को डंडों से खदेड़ रही है।

किसान सिर्फ इतना मांग रहे हैं: समय पर खाद। अगर यह नहीं मिला, तो खरीफ की फसल संकट में जाएगी और इसका असर सीधा हर भारतीय की थाली तक पहुंचेगा।

मुकुल सरल

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